Revolts Of 1857 | 1857 के विद्रोह

1857 के विद्रोह के समय मुगलबादशाहू के पद पर वहादुर शाह-II था । इस समय भारत के गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग थे । इस समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री लार्ड पार्मस्टेन थे, जबकि विरोधी दल का नेता डिजरैली था।

1857 के विद्रोह का स्वरूप / प्रकृति

भारतीय विद्वानों का बात

  1. यह सुनियोजित ढंग से किया गया प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था → BD सावरकर
  2. यह न तो प्रथम न राष्ट्रीय और न स्वतंत्रता संग्राम था → R.C मजुमदार
  3. यह जनक्रांति था → रामविलाश शर्मा
  4. यह राष्ट्रीय विद्रोह नहीं था, क्योंकि इस समय तक भारत में राष्ट्रवाद का विकास नहीं हुआ था । → पंडित नेहरू
  5. अगर यह राष्ट्रीय संग्राम नहीं था तो उसे सिपाही विद्रोह कहना → S. N सेन भी गलत होगा

Note : 1857 के विद्रोह के सरकारी इतिहासकार S. N सेन थे जिन्होंने “1857 पुस्तक की रचना की |

विदेशी विद्वानों का मत

  1. यह एक राष्ट्रीय विद्रोह था – डिजरैली
  2. 2. यह एक सैनिक सिपाही विद्रोह था। → जॉन सीले ” मार्लेसन, ट्रेवेलियन, लॉरेंस
  3. यह सभ्यता एवं बर्बरता के बीच का युद्ध था | → T.R. Homes
  4. यह हिन्दुओं और मुसलमानों का अंग्रेजों के ‘खिलाफ षड्यन था | → जेम्स आउट्रम , w. टेलर

निष्कर्ष : हम कह सकते हैं | कि यह पूर्णतः न सिपाही विद्रोह था, न जनक्रांति थी बल्कि कुछ सिपाही और कुछ भारतीयों द्वारा किया गया एक क्रांति था। क्रांति उसे हम इस लिहाज से कह सकते हैं क्योंकि 1857 के विद्रोह में भारत में आमूलचूल परिवर्तन किया । जैसे कि 1857 के विद्रोह के पूर्व जहाँ भारत में अंग्रेजी कंपनी का शासन था उसे समाप्त कर अंग्रेजी सरकार के प्रत्यक्ष तौर पर भारत में शासन की स्थापना हुई ।

तात्कालिक कारण : (चर्बीयुक्त कारतूस का शामिल होना )

अंग्रेजी कम्पनी ने Dec 1856 AD में अपनी सेना में ब्राउन बेस राईफल के जगह Dec 1856 में एनफिल्ड राईफल को शामिल किया। इस राईफल को चलाने हेतु प्रशिक्षण दमदम (बंगाल), अंबाला (पंजाब) और सियालकोट (पाकिस्तान) में दिया जाता था। एनफिल्ड राईफल में कारतूस भरने से पहले उसके खोल को मुँह से खोलना होता था। कारतुस के ऊपरी खोल के विषय में यह अफवाह फैली की इसमें गाय और सुअर की चर्बी बाला मिली हुई थी। जो हिन्दु और मुसलमानों दोनो धर्मों के लिए सही नहीं था। जब इस बात की खबर बंगाल के बैरखपुर के 34वीं NT के सिपाही मंडल पांडे को लगी तो उन्होंने एनफिल्ड राईफल को प्रयोग में लाने से इन्कार कर दिया और अपने बड़े अधिकारी जनरल हयूरसन और जनरल बाग की 29 March, 1857 को हत्या कर दी । इसी कारण मंगल पाण्डे को पकड़कर 8 Apr 1857 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया | 1857 के विद्रोह में शहीद होने वाले प्रथम नेता मंगल पांडे थे। जो 1857 के विद्रोह के शुरू होने पहले ही शहीद हो गए।

विद्रोह का आरंम्भ :

1857 के विद्रोह की शुरूआत 10 may 1857 से मेरठ से हुई |

प्रसार और नेतृत्वकर्ता :

सम्पूर्ण भारत 1857 के बिद्रोह में प्रभावित नही था | बल्कि भारत का कुछ हिस्सा जैसे मध्य-भारत, उत्तर-भारत प्रभावित था

दिल्ली : इस क्षेत्र में 1857 के विद्रोह की शुरूआत 12 May 1857 से मानी जाती है। इस क्षेत्र से नेतृत्वकर्ता मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर था।जबकि सैन्य नेतृत्व बख्त खाँ के द्वारा किया गया था। दिल्ली के क्षेत्र में विद्रोह को दबाने हेतु निकलसन और हडसन को भेजा गया जिसमें विद्रोह को दबाते हुए निकलसन मारा गया जबकि हडसन ने Sep 1857 आते- जाते विद्रोह को दबा दिया।

अवध और लखनऊ : इस क्षेत्र में विद्रोह की शुरुआत June 1857 से हुई मानी जाती है। इस क्षेत्र के से विद्रोह का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने की । लखनऊ के क्षेत्र में विद्रोह को दबाते हुए हेनरी लॉरेंस मारे गए जबकि विद्रोह को कैंपबेल के द्वारा बाया गया। बेगम हजरत महल विद्रोह के समाप्ति के अंतिम दौर में भागकर भागकर नेपाल चली गयी |

कानपूर : इस क्षेत्र विद्रोह की शुरुआत June 1857 से हुई मानी जाती है | में विद्रोह नाना साहे से नाना लान नेतृत्व की शुरुआत जाती है। इस क्षेत्र साहेब ने किया । पाटल नाम धोद पंत था । नाना साहेब के प्रमुख सलाहकार उजीमुल्ला थे जिन्होंने नाना साहेब के पेंशन की पैरवी की कानपुर से सैन्य नेतृत्व तात्या टोपे ने सम्भाला तात्या टोपे का मूल नाम रामचन्द्र पांडुरंग था । तात्या टोपे अपने मित्र के धोखाधड़ी के कारण मारे गये। विद्रोह के अंतिम दौर में नाना साहेब भागकर नेपाल चले गए। इस क्षेत्र में अंग्रेज सेनापति कैंपवेल ने विद्रोह को दबाया ।

बिहार : बिहार में 1857 के विद्रोह की शुरूआत देवधर कें रोहिनी गाँव से 12 June 1757 से हुई मानी जाती है। पटना के क्षेत्र में 1857 के विद्रोह की शुरुआत 3 July 1857 से हुई मानी जाती है। पटना के क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली के द्वारा किया गया था। पटना के पश्चात् यह विद्रोह दानापुर, मुजफ्फरपुर, आरा पहुँचा । पूरा बिहार इस विद्रोह से प्रभावित नहीं था ।

बिहार से इस विद्रोह का नेतृत्वकर्ता आरा के जगदीशपुर के जमींदार वीर कुँवर सिंह को माना जाता है, उन्होने लगभग 80 वर्ष की उम्र में नाना साहेब और रानी लक्ष्मीबाई साथ मिलकर अंग्रेजों को कड़ी शिकस्त दी | वीर कुँवर सिंह का संघर्ष अँग्रेज अधिकारी लिग्रांड के साथ 23 Apr. 1858 हुआ !इस संघर्ष में वीर कुँवर सिंह ने लिग्रांड को पराजित किया इसी कारण प्रत्येक वर्ष 23 Apr को विजय दिवस के में मनाया जाता है। इस संघर्ष के दौरान ही वीर कुँवर सिंह बुरी तरह घायल हुए | कुछ ही दिनों के पश्चात् उनका निधन हो गया।तत्पश्चात् विद्रोह का नेतृत्व कुँवर सिंह के भाई अमर सिंह ने सँभाला। बिहार के क्षेत्र में विद्रोह को दबाने का श्रेय विलियम टेलर और विंसेट आयर को जाता है |

झाँसी और ग्वालियर : इस क्षेत्र का नेतृत्त्व रानी लक्ष्मीबाई के द्वारा किया गया है। उनका जन्म बनारस में जबकि समाधि स्थल ग्वालियर में है । उनके बचपन का नाम मनु इस क्षेत्र से 1857 के विद्रोह या मणिकर्णिका थी । रानी लक्ष्मीबाई जनरल हसेज हयरोज से लड़ती हुई 17 June 1858 को मारी गई । जनरल ह्यूरोज ने रानी लक्ष्मीबाई को एक मर्द की संज्ञा दिया | झाँसी के क्षेत्र में विद्रोह को दबाने का श्रेय जनरल ड्यूरोज को जाता है।

फैजाबाद (अयोध्या) : इस क्षेत्र से 1857 के विद्रोह का नेतृत्त्व मौलवी अहमदल्ला के द्वारा किया गया। यह मूल रूप से दक्षिण भारत का रहने वाला था। मौलवी अहमदुल्ला अंग्रेजी सरकार का कट्टर दुश्मन था। इस क्षेत्र में विद्रोह को दबाने का श्रेय कैंपवेल को जाता है। हाल ही के दिनों में फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया,

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