राजा राम मोहन राय | ब्रह्म समाज Raja Ram Mohan Ray | Brahma-Samaj

राजा राम मोहन रॉय | ब्रह्म समाज Raja Ram Mohan Ray | Brahma-Samaj : 19वी -20वी शताब्दी में भारत में सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन की शुरुआत हुई 19 सी शताब्दी का सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन नारी केंद्रित था वही 20वी शताब्दी का सुधार आंदोलन निम्न जाति का केंद्रित था | इस आंदोलन की शुरुआत भारत के बंगाल प्रांत से हुई मानी जाती है बंगाल प्रांत से आंदोलन को शुरुआत करने का श्री राजा राममोहन राय को जाता है |

राजा राम मोहन रॉय

राजा राममोहन राय का जन्म 1772 ईस्वी में कोलकाता प्रेसीडेंसी में हुआ था इनका समकालीन मुगल बादशाह अकबर द्वितीय था जिन्होंने राजा राममोहन राय को राजा की उपाधि प्रदान की राजा राजा राम मोहन रॉय के द्वारा ही 19वी शताब्दी में बंगाल के क्षेत्र से सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन की शुरुआत की गई जिस कारण ने सुधार आंदोलन का पिता, नवभारत का तारा ,आधुनिक भारत का पिता इत्यादि उपनाम से जाना जाता है |

राजा राममोहन राय अकेश्वरबाद यानि एक ईश्वर की पूजा पर बल दिया करते थे | अकेश्वरबाद विचारधारा के प्रचार प्रसार करने हेतु राजा राममोहन राय ने 1815 ईस्वी में कोलकाता में आत्मीय सभा की स्थापना किया | राजा राम मोहन राम मूर्ति पूजा का विरोध हुआ करता था इन्होंने 1821 ईस्वी में सती प्रथा का विरोध करने हेतु बंगाल भाषा में संवाद संवाद कुमुदी नामक ग्रंथ की रचना की |

राजा राममोहन राय ने 1828 ईस्वी में कलकाता में ब्रह्म समाज की स्थापना किया और इसके मध्य से सती प्रथा का विरोध किया इन्हीं के प्रयास में 1829 में लॉर्ड विलियम बैटिंग में भारत में सती प्रथा का समाप्त किया |

राजा राममोहन राय में भारतीयों को सूचित करने हेतु 1817 में हिंदू कॉलेज और 1825 में वेदांत कॉलेज की स्थापना के राजा राममोहन राय को द्वितीय का प्रतिनिधित्व के लिए इंग्लैंड गए जहां 1833 ईस्वी में ब्रिस्टल नामक शहर में उनका निधन हो गया राजा राममोहन राय के निधन के पश्चात ब्रह्म समाज का नेतृत्व देवेंद्र नाथ टैगोर ने संभाला देना टैगोर ने 1839 ईस्वी में तत्वों की सभा की स्थापना किया इन्होंने इन सभा के प्रचार प्रसार हेतु तत्व बोधिनी नामक पत्रिका के संपादन किया |

बाद के दिनों में ब्रह्म समाज में दो बार विभाजन हुआ ब्रह्म समाज में पहली बार विभाजन 1866 ईस्वी में हुआ और ब्रह्म समाज के अलग आदेश ब्रह्म समाज की स्थापना हुई इसके संस्थापक देवेंद्र नाथ टैगोर को माना जाता है ब्रह्म समाज में दूसरी बार विभाजन 1878 ईस्वी में हुआ था पश्चात साधारण ब्रह्म समाज अस्तित्व में आया इसके संस्थापक आनंद मोहन बस माने जाते हैं राजा राममोहन राय ने फारसी भाषा में मिरात उल अखबार यदि ग्रंथ की रचना किया |

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