हड़प्पा सभ्यता Harappa Sabhyata In Hindi

 हड़प्पा सभ्यता Harappa Sabhyata In Hindi: – 1920 में शुरुआती पूरा तत्वों ने इस स्थल को ढूंढा और तब पता चला कि यह खंडार उपमहाद्वीप के सबसे प्राचीन पुराने चेहरों में से एक है|क्योंकि इस इलाके का नाम उस समय हड़प्पा था| इसीलिए बाद में यहां से मिलने वाली सभी पुरातात्विक वस्तुओं और इमारतों का नाम हड़प्पा सभ्यता के नाम पर पड़ा है | हड़प्पा की पहली खुदाई 1921 में दयाराम साहनी द्वरा की गई थी|

 इन नगरो  का निर्माण लगभग 4700 साल पहले हुआ था |

इन नगरों में से कई को दो या उससे ज्यादा हिस्सों में विभाजित किया गया था पश्चिमी भाग छोटा था लेकिन ऊंचाई पर बना हुआ था और पूर्वी हिस्सा बड़ा था लेकिन यह निचले हिस्से में था| ऊंचाई वाले भाग को पूरातत्वों ने नगर दुर्ग कहा और निचले हिस्से को निचला नगर कहा गया |

दोनों हिस्सों को चारदीवारीयो से घेरा गया था जो पक्की ईंटो से बनाई गई थी ये इंटे अच्छी तरह से पक्की हुई थी जिसकी दीवार हजारों साल बाद आज तक खाड़ी रही  दीवार बनाने के लिए ईंटो की चुनाई इस तरह से करते थे जिससे ये दीवारे सालो साल खाड़ी रहे |

कुछ नगर नगरो के दुर्ग में कुछ खास इमारते बनाई गई थी मिसाल के तौर पर मोहनजोदड़ो में एक खास तालाब बनाया गया था जिसे पूरा तत्वों ने महान स्नानागार कहा था| इस तालाब को बनाने में ईंट और प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया था इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए प्लास्टर के ऊपर चारकोल की परत चढ़ाई गई थी|

इस सरोवर में दो तरफ से उतरने के लिए सीढ़ियां बनाई गई थी और चारों और कमरे बनाए गए थे इसमें भरने के लिए पानी कुँए से निकाला जाता था उपयोग के बाद इसे खाली कर दिया जाता था| सयाद यहाँ विशिष्ट नागरिक विशेष अवसरों पर स्नाना किया करते थे कालीबंगा और लोथल जैसे अन्य नगरों में अग्नि कुंड मिले है संभोता यहाँ  यज्ञ किए जाते होंगे|

मोहनजोदड़ो और लोथल जैसे नगरो में बड़े-बड़े भंडारगृह मिले है इन नगरो के घर आमतौर पर एक या दो मंजिले होते थे घर के आंगन के चारों ओर कमरे बनाए जाते थे इसके अलावा अधिकांश घरों में अलग-अलग स्नानागार भी होते थे और कुछ घरों में तो कूए भी होते थे  

हड़प्पा सभ्यता Harappa Sabhyata In Hindi

हड़प्पा सभ्यता के कई नगरों में ढके हुए नाले थे| इन्हें सावधानी से सीधी लाइन में बनाया गया था| हर नाली में हल्की ढलान होती थी| ताकि पानी आसानी से बिना रुके बह सके अक्सर घरों की नालियों को सड़कों की बड़ी नालियों से जोड़ दिया जाता था| जो बाद में बड़े बड़े नालों में जा कर मिल जाती थी|

नाले ढके होने के कारण इनमें जगह-जगह पर मेनहोल बनाए गए थे| जिनके जरिए समय समय पर इनकी देखभाल और सफाई की जा सके|

घर नाले और सड़कों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से एक साथ ही किया जाता था | सड़के एक दुसरे को समकोण पर काटती थी सड़को के किनारे नालिया बनाई जाती थी | इन सभी बातों को देखते हुए हमें पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता 4500 साल पहले भी कितनी विकसित एवं सभ्य थी |

उन दिनों हड़प्पा के नगरों में बड़ी हलचल रहा करती होगी | यहां पर ऐसे लोग रहते होंगे जो नगर की खास इमारतो को बनाने की योजना में जुटे रहते होंगे|संभवत ये यहां के शासक थे यह भी संभव है कि यह शासक लोगों को भेजकर दूर-दूर से धातु बहुमूल्य पत्थर और अन्य उपयोगी चीजें मंगवाते थे शायद शासक लोग खूबसूरत मनको तथा सोने चांदी से बने आभूषणों जैसी कीमती चीजों को अपने पास रखते होंगे|

इन नगरों में लिपिक भी होते थे| जो मुंहरो के ऊपर तो लिखते ही थे और शायद अन्य चीजों पर भी लिखते होंगे जो बच नहीं पाई है| इसके अलावा नगरों में शिल्पकार स्त्री पुरुष में रहते थे जो अपने घर हो या किसी अन्य स्थल पर तरह-तरह की चीजें बनाते होंगे |

 हड़प्पा में लोगों को कई चीजें वही मिल जाया करते थे लेकिन तांबा लोहा सोना चांदी और बहुमूल्य पदार्थों का दूर-दूर से आयत करते थे| हड़प्पा के लोग तांबे का आयत संभवता आज के राजस्थान से करते थे| यहां तक कि पश्चिमी एशियाई देशों से भी तांबे का आयात किया जाता था|

कांसा बनाने के लिए तांबे के साथ में मिलाई जाने वाली धातु टीन का आयात आधुनिक ईरान और अफगानिस्तान से किया जाता था| सोने का आयात आधुनिक कर्नाटक और बहुमूल्य पत्थर का आयात गुजरात ईरान और अफगानिस्तान से किया जाता था| इससे हमें पता चलता है की हड़प्पा सभ्यता के लोग हजारों साल पहले आयात और निर्यात के द्वारा व्यापार भी किया करते थे |

हड़प्पा सभ्यता के लोग लंबी दूर की  यात्राएं भी करते थे |  और वहां से अपने लिए उपयोगी वस्तुएं लाया करते थे | और सुदूर देशों के जहा वे जाते थे वहा की किस्से कहानियां एवं संस्क्रती की जानकारी  भी लाते थे|

हड़प्पा सभ्यता की खुदाई के दौरान मिट्टी से बने कई  खिलौने भी मिले हैं जिनसे उस समय के बच्चे खेला करते होंगे | यहा कुम्हार का चाक , श्रमिक आवस ,अन्नागार , RH37 नाम का कबरिस्तान, मातृदेवी कि मुरति , ओखली, ताबूत,हाथी कि खोपड़ी आदि प्रप्त हुये है | हड़प्पा के नगरों से प्राप्त हुए पूरा तत्वों को जो चीजें मिली है उनमें अधिकतर पत्थर,शंख,तांबे,कांसे और सोना चांदी जैसी धातुओं से बनाई गई थी| तांबे और कांसे से  हथियार और बर्तन बनाए जाते थे| यहां मिली सबसे आकर्षक वस्तुओं में मनके, बाट, फलक और मातृदेवी कि मुर्ति है |

 हड़प्पा सभ्यता के लोग पत्थरो की मुहरे बनया करते थे | जिन पर सामान्य जानवरों के चित्र मिलते हैं| सबसे अधिक एकश्रृंगीय जानव के चिनह थे | हड़प्पा सभ्यता के लोग बर्तनो को लाल मिट्टी से बनते थे| जिन पर काले रंग के खूबसूरत कालाकृतिया होती थी

  लोग नगरो के अलवा गाँवो में भी रहा करते  थे| वे लोग अनाज उगते एवं जानवर पालन करते थे| किसान और चरवाहे शहरों में रहने वाले शासकों एवं लेखकों और दस्त कारों को खाने के सामान दिया करते थे| पौधों के अवशेषों से पता चलता है कि हड़प्पा के लोग गेहूं, जौ, डाले मटर ,धान, तिल और सरसों आदि उगते थे|

उस समय जमीन की जुताई के लिए हल प्रयोग एक नई बात थी| हड़प्पा काल के हल तो नहीं बच पाए हैं क्योंकि वे प्राय लकड़ी से बनाए जाते थे लेकिन हल के आकार के खिलौने मिले हैं इससे यह साबित होता है कि उस समय खेती के लिए हलो का प्रयोग भी किया जाता था|

हड़प्पा के लोग गाय भैंस भेड़ और बकरियों पालते थे बस्तियों के आसपास तालाब और चारागाह होते थे लेकिन सूखे महीनों में मवेशियों के झंडों को चारा पानी की तलाश में दूर-दूर तक ले जाया जाता था| वे बेर जैसे फलों को इकट्ठा करते थे मछलियां पकड़ते थे और हिरण जैसे जानवरों का शिकार भी किया करते थे|

कचछ के इलाके में खादिर बेट के किनारे धोलावीरा नगर बसा था वह सफ पानी मिलता था और जमीन उपजाऊ थी|  जहां हड़प्पा सभ्यता के कई नगर दो या उसे अधिक  भागों में विभक्त था| धोलविरा नगर को तीन भागों में बांटा गया था | इसके हर हिस्से के चारो और पत्थर की  ऊंची दीवार बनाई गई थी| इसके अंदर जाने के लिए बड़े-बड़े प्रवेश द्वार थे इस नगर में खुला मैदान भी था जहां सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे|

अंत में, हड़प्पा सभ्यता मानव इतिहास के यात्राकाल में एक प्रेरणास्पद अध्याय के रूप में बनी हुई है, जो एक प्राचीन समाज की कुशलता और उपलब्धियों को प्रदर्शित करती है। उनके सांस्कृतिक पहलुओं को छाया में ढकने वाले रहस्यों के बावजूद, उनके नगरों की सूज-बूज़ योजना और उनकी तंतु प्रणालियों की विशेषज्ञता ने एक अद्वितीय विरासत को प्रमोट किया है। हड़प्पा सभ्यता का अध्ययन करना हमें न केवल हमारे इतिहास के पिछले काल की समृद्धि से परिपूर्ण करता है, बल्कि यह भी हमें पूर्व सभ्यताओं के सांस्कृतिक विकास के मानचित्र पर सोचने पर प्रोत्साहित करता है।

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