Cell | कोशिका

कोशिका (Cell) सभी सजीवो अथवा जीवन की आधारभूत संरचना एवं क्रियात्मक इकाई (Basic Structural and Functional Unity है।

कोशिका द्रव्य (Protoplsm) से बनी संरचना होती है और इस जीवद्रव्य में कई कार्बनिक तथा अकार्बनिक यौगिक उपस्थित रहते हैं।

सभी जीवों की कोशिका एक समान नहीं होती है। अलग-अलग सजीवों की कोशिका आकार, स्वरूप (Shape) तथा संख्या मैं एक-दूसरे से काफी भिन्न होते है।

  • संसार की सबसे छोटी कोशिका- माइक्रोप्लाज्मा गैलिसेष्टिकम
  • संसार की सबसे बड़ी कोशिका- शुतुरमुर्ग का अंडा 170 135man संसार शरीर की सबसे छोटी कोशिका – मस्तिष्क के सेरीवेलम का ग्रेन्यूल कोशिका
  • मानव शरीर की सबसे बड़ी कोशिका अंडाणु (Ova)
  • मानव शरीर की सबसे लम्बी कोशिका न्यूरॉन

कोशिका का आकार एवं आकृति कैसी होगी, यह कोशिका के कार्यों पर निर्भर करता है अर्थात अलग-अलग कार्य करने वाले कोशिका का आकार एवं आकृति एक-दूसरे से भिन्न होती है।

कुछ कोशिका अपना आकार पल-पल बदलते भी रहते हैं। अमीबा तथा मनुष्य का WBC कोशिका का आकार निश्चित नहीं रहता है। ये दोनों ही कोशिका अपना आकार बदलते रहती है।

सभी सजीवों में कोशिका की संख्या भी एक समान नहीं होती है। कोशिका के संख्या के आधार पर सजीवों को दो समूहों में रखा गया है |

  1. Unicellular (एककोशिकीय)- जब जीवों के शरीर केवल एक ही कोशिका से निर्मित होता है वह एक कोशिकीय जीव कहलाते हैं। ये जीव आँखों से है। आँखों से दिखाई नहीं पड़ते हैं, इन्हें देखने हेतु सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता पड़ती है उदाहरण:- सूक्ष्मजीव (Micro Organism)
  2. Multicellular (बहुकोशिकीय)- इन जीवों का शरीर अनेक कोशिका से मिलकर बना होता है। उदाहरण:- सभी दिखने वाले सजीव

विभिन्न सजीवों में कोशिका की संख्या कितनी होगी, यह सजीवों के शरीर के आकार पर निर्भर करता है। शरीर का आकार जितना बड़ा होगा उसमें कोशिका की संख्या उतनी ही अधिक होगी।

कोशिका का विकासक्रम

1590 : जैड जैनसेन तथा एच. जैनसेन ने माइक्रोस्कोप की खोज की और इसके साथ ही कोशिका अध्ययन का मार्ग खुल गया ।

1665 : रॉबर्ट हुक ने अपनी द्वारा बनाये गये माइक्रोस्कोप से कोशिका की खोज की। कोशिका का नामांकरण भी रॉबर्ट हुक के द्वारा किया गया।

  • कोशिका (Cell) लैटिन शब्द से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है छोटा कमरा।
  • रॉबर्ट हुक ने कोशिका की खोज कॉर्क (पेड़ की छाल) के टुकड़े में किया था।
  • रॉबर्ट हुक द्वारा खोजा गया कोशिका का मृत कोशिका था ।
  • 1683 : ल्यूवेनहॉक द्वारा सर्वप्रथम जीवित कोशिका की खोज की गई। ल्यूवेनहाक ने पहले की तुलना में उन्नत माइक्रोस्कोप द्वारा जीवित कोशिका के रूप में जीवाणु, प्रोटोजोआ, RBC कोशिकाओं को देखा।
  • 1831 : रॉबर्ट ब्राउन ने कोशिका के मध्य एक गोल संरचना देखी, जिसका नाम उन्होंने केन्द्रक (Nucleus) नाम दिया
  • 1838-39 : जैकब श्लाइडेन तथा श्वान ने कोशिका मतवाद (Cell theory) प्रस्तुत कि, जिसके बाद यह स्पष्ट हो पाया कि प्रत्येक सजीव का शरीर कोशिकाओं से निर्मित है।

: श्लाइडेन तथा श्वान के द्वारा प्रस्तुत कोशिका मतवाद की प्रमुख बातें-

  1. प्रत्येक जीव का शरीर एक अथवा अनेक कोशिकाओं से निर्मित होता है।
  2. प्रत्येक जीव की उत्पत्ति एक कोशिका से ही होती है।
  3. प्रत्येक कोशिका अपने आप में एक स्वाधीन इकाई है परंतु सब कोशिका मिलकर काम करते हैं, परिणामस्वरूप एक जीव का निर्माण होता है।
  1. कोशिका की उत्पत्ति जिस भी प्रक्रिया से हो उसमें कोशिका का केन्द्रक मुख्य भूमिका अदा करता है।
  • 1839 : पुरकिंजे ने कोशिका में पाये जाने वाले अर्धतरल एवं दानेदार पदार्थ को जीवद्रव्य (Proplasm) नाम दिया
  • 1846 : पुरकिंजे के बाद वॉन मोल ने कोशिका में पाये जाने वाले जीवद्रव्य की खोज की।
  • 1855 : रूडॉल्फ विरचॉव ने यह पता लगाया कि नये कोशिका का निर्माण पहले मौजूद कोशिकाओं के विभाजन के फलस्वरूप होता है।
  • 1861 : मैक्स शुल्ज ने कोशिका को जीवद्रव्य (Protoplsm) का एक पिंड बताया। उनका यह मत Protoplasm Theory कहलाया।
  • 1931 : एम. नॉल तथा ई. रस्का ने इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का आविष्कार किया। इसके बाद कोशिका के क्षेत्र में काफी तीव्र गति से अनुसंधान होने लगा।

कोशिका की संरचना

कोशिका को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बाँटा जा सकता है- कोशिका सल्ली (पौधे में कोशिका झिल्ली के अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी) और जीवद्रव्य ।

जीवद्रव्य को पुनः दो हिस्सों में विभक्त किया जाता है- कोशिकाद्रव्य तथा केन्द्रक।

कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में ढेर सारी रचनायें (Structure ) पायी जाती है। जो दो प्रकार के होते हैं-

1. जीवद्रवीय रचनायें (Organoids) – इसके अंतर्गत जीवित रचनायें आते हैं जिनमें बढ़ने तथा विभाजन करने की क्षमता होती है। ये रचनायें हैं-

  • (i) सेंट्रोसोम
  • (ii) आंतरद्रव्य जालिका
  • (iii) राइबोसोम
  • (iv) माइटोकॉण्ड्रिया
  • (v) लवक
  • (vi) गॉल्जीकाय
  • (vii) लाइसोसोम

2. मेटाप्लास्ट्स (Metaplast) – ये निर्जीव रचनायें हैं जिनमें न तो बढ़ने की क्षमता होती है और न ही विभाजन करने की |

  • मेटाप्लास्ट के अंतर्गत रसधानी, वसा-कण, प्रोटीन, ग्लाइकोजेन, पीत आदि आते है
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