परमाणु संरचना नोट्स | Atomic Structure Notes in Hindi

> परमाणु (Atom): परमाणु, तत्व का वह छोटा से छोटा कण है, जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है परन्तु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता है। परमाणु विद्युततः उदासीन होते हैं।

> अणु (Molecule): तत्व तथा यौगिक का वह छोटा से छोटा कण है, जो स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है, अणु कहलाता है।

> परमाणु-भार (Atomic weight): किसी तत्व का परमाणु- भार वह संख्या है, जो यह प्रदर्शित करता है कि तत्व का एक परमाणु कार्बन-12 के परमाणु के 1 / 12 भाग द्रव्यमान अथवा हाइड्रोजन के 1.008 भाग द्रव्यमान से कितना गुना भारी है।

अणु-भार (Molecular weight): किसी पदार्थ का अणुभार वह संख्या है, जो यह प्रदर्शित करती है कि उस पदार्थ का एक अणु कार्बन-12 के एक परमाणु के 1/12 भाग से कितना गुना भारी है।

मोल धारणा (Mole concept) : एक मोल किसी भी निश्चित सूत्र वाले पदार्थ की वह राशि है, जिसमें इस पदार्थ के इकाई सूत्र की संख्या उतनी ही है, जितनी शुद्ध कार्बन-12 आइसोटोप के ठीक 12 ग्राम में परमाणुओं की संख्या है।

मोल इकाई का मान : मोल का मान 6.022 x 1023 है। कार्बन के 12 ग्राम या एक मोठ में 6.022 x 1023 परमाणु हैं। 6.022 × 100 को आयोगाड़ो संख्या कहते हैं।

मोल संख्या एवं द्रव्यमान दोनों का प्रतीक है। सन् 1967 में मोल को इकाई के रूप में स्वीकार किया गया।

★ 20वी शताब्दी में आधुनिक खोजों के परिणामस्वरूप जे जे. थॉमसन, रदरफोर्ड, चैडविक आदि वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया कि परमाणु विभाज्य है तथा मुख्यतः तीन मूल कणों से मिलकर बना है, जिन्हें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन कहते हैं।

प्रमुख मूल कणों के अभिलक्षण

मूल कण प्रतीक आवेश द्रव्यमान (ग्राम) द्रव्यमान (amu)खोजकर्ता
इलेक्ट्रॉन-1e01 -9.1095 x 10g 0.0005486जे. जे. थॉमसन
प्रोटॉन 1p1 +11.6726x10g 1.0073335गोल्डस्टीन
न्यूट्रॉन0n10 1.6749×1024g 1.008724चैडविक
(1932)

नोट: सबसे पहले इलेक्ट्रॉन के आवेश का सफलतापूर्वक निर्धारण मिलीकन ने किया। (तेल बूँद प्रयोग विधि से) ।

इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति की खोज डी ब्रोग्ली ने की थी। >

पॉजिट्रॉन की खोज एण्डरसन ने की थी।

भारतीय वैज्ञानिक सत्येन्द्र नाथ बसु के नाम पर विशिष्ट मूल कण बोसॉन का नाम रखा गया है।

लगभग द्रव्यमानहीन एवं आवेशहीन कण न्यूट्रिनों की खोज पौली ने 1930 में किया था। इसमें प्रचक्रण होता है।

रदरफोर्ड एवं उसके विद्यार्थियों हेंस गीगर और अर्नेस्ट मार्सडेन ने सोने की बहुत ही पतली पत्ती पर कणों के बौछार कर परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया ।

इस मॉडल के अनुसार :

1 परमाणु का धनावेश तथा अधिकांश द्रव्यमान एक अति अल्प क्षेत्र में केन्द्रित था । परमाणु के इस अति अल्प भाग को रदरफोर्ड ने नाभिक कहा।

नोट – रदरफोर्ड ने गणना करके दिखाया कि नाभिक का आयतन, परमाणु के कुल आयतन की तुलना में अत्यंत कम (नगण्य) होता है। परमाणु की त्रिज्या लगभग 10 10 त्रिज्या लगभग 10-15 m होती है। m होती है जबकि नाभिक की

2. नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार पथों, जिन्हें कक्षा (orbit) कहा जाता है, में तेजी से घूमता है।

3. इलेक्ट्रॉन और नाभिक आपस में आकर्षण के स्थिर वैद्युत बलों द्वारा बँधे होते हैं।

रदरफोर्ड मॉडल का दोष

1. रदरफोर्ड परमाणु मॉडल किसी परमाणु की स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाता है ।

2. यह मॉडल इलेक्ट्रॉनिक संरचना के बारे में कुछ भी वर्णन नहीं करता हैं, अर्थात् इससे यह पता नहीं चलता है कि ये इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों किस प्रकार विद्यमान है और इनकी ऊर्जा क्या है ?

परमाणु क्रमांक (Atomic number) : किसी तत्व के । परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु क्रमांक कहते हैं।

द्रव्यमान संख्या (Mass number) : किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्याओं का योग उस परमाणु की द्रव्यमान संख्या कहलाती है। अर्थात्

द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या

क्वाण्टम संख्या (Quantum Number): स्पेक्ट्रम रेखाओं की सूक्ष्म प्रकृति समझाने तथा इलेक्ट्रॉन की ठीक-ठीक स्थिति का वर्णन करने हेतु चार क्वाण्टम संख्याओं का प्रयोग किया जाता है, ये हैं-

1.मुख्य क्वाण्टम संख्या (Principal Quantum number),’n’ : यह एक धनात्मक पूर्णांक होती है। इसका मान 1, 2, 3 … आदि हो सकता है । ” का मान बढने से अनुमत कक्षकों की संख्या बढ़ती है। इसे 2 द्वारा दिया जाता है। यह इलेक्ट्रॉन के मुख्य ऊर्जा स्तर को प्रदर्शित करती है। 11 के बढ़ने से कक्षक की ऊर्जा बढ़ेगी।

2.दिगंशी क्वाण्टम संख्या (Azimuthal Quantum number) T यह इलेक्ट्रॉन कक्षक (orbital) की त्रिविमीय आकृति को प्रकट करती है। / का न्यूनतम मान शून्य तथा अधिकतम मान (- 1) होता है।

3.चुम्बकीय क्याण्टम संख्या (Magnetic Quantum number), यह उप ऊर्जा स्तरों के कक्षकों (orbitals) को प्रदर्शित करती है। m का मान / के मान पर निर्भर करता है। किसी / के लिए m का मान + / से लेकर -1 तक होते हैं (शून्य सहित)।

4.चक्रण क्वाण्टम संख्या (Spin quantum number) m 1925 में जार्ज उहलेन बैक और सैमुअल गाउटस्मिट ने एक चौथी क्वांटम संख्या की उपस्थिति प्रतिपादित की, जो इलेक्ट्रॉन प्रचक्रण क्वाटम संख्या (m.) कहलायी। यह इलेक्ट्रॉन के चक्रण की दिशा को प्रदर्शित करती है। किसी चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या (mi) के लिए चक्रण क्वाण्टम संख्या (s) का मान + 1/2 और -1/2 होता है।

नोट : क्वांटम यांत्रिकी का मूल समीकरण श्रोडिंजर द्वारा प्रतिपादित किया गया। इसके लिए 1933 में इन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला । पाऊली का अपवर्जन नियम (Pauli’s exclusion principle, 1925) इसके अनुसार एक दिए गए परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वाण्टम संख्याओं का मान समान नहीं हो सकता। अतः यदि दो इलेक्ट्रॉनों के “, 1 और ” के मान एक ही हो, तो उनका चक्रण विपरीत होगा।

हुण्ड का अधिकतम बहुलता का नियम (Hund’s rule of maximum multiplicity) इसके अनुसार इलेक्ट्रॉन तब तक युग्मित नहीं होते जब तक कि रिक्त कक्षक प्राप्य (available) हैं अर्थात् जब तक संभव है, इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहते हैं।

हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त (Heisenberg’s uncertainty principle) इसके अनुसार किसी कण की स्थिति (position) और वेग (velocity) का एक साथ यथार्थ (exact) निर्धारण असंभव है ।

ऑफबाऊ नियम (Aufbau principle) इस नियम द्वारा तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने के लिए विभिन्न परमाणु कक्षकों की ऊर्जा बढ़ने का क्रम इस प्रकार है- 1s 2s 2p <3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s< 4d < 5p < 6s < 4f< 5d < 6p <7s

समस्थानिक (Isotopes ) समान परमाणु क्रमांक परन्तु भिन्न परमाणु द्रव्यमानों के परमाणुओं को समस्थानिक (Isotopes) कहते हैं । समस्थानिकों में प्रोटॉन की संख्या समान होती है, किन्तु न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है। जैसे—H’,H? तथा H3 समस्थानिक हैं। रासायनिक अभिक्रिया में सभी समस्थानिक एक-सा व्यवहार करते हैं लेकिन इनके भौतिक गुण भिन्न होते हैं।

Join Telegram Channel for Update
Share your love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *